राहुल त्रिपाठी
कन्नौज का पुरातन इतिहास गवाह है कि पुराणों में महोदय व कान्यकुब्ज नाम से ख्याति पाने वाली धरती समय-समय पर महिलाओं-कन्याओं की दर्रिंदगी का शिकार होती रही हैं। कई विदेशी अक्रांताओं ने कन्नौज की आधी आबादी पर जुल्म में सभी सीमाआएं पार की हैं, जिसके जिंदा सबूत आज भी हैं। अब वर्तमान परिदृश्य में कन्नौज रेप कांड पर प्रदेश भर के लोगों की नजर व चर्चाएं है, क्यों कि सपा शासन काल में कन्नौज वीवीआईपी जिला था, सूबे के इटावा के बाद कन्नौज का नाम दिनरात रोशन था, जबकि कई जिलों में अंधा कुप था।
अरोपी नबाब सिंह यादव की तूती बोलती थी, कन्नौज लोकसभा जो कन्नौज, तिर्वा-उमर्दा, छिबरामउ सहित औरैया जिले की विधूना और कानपुर देहात की रसूलाबाद तक विस्तारित है, वहां 2012 से ही नबाब सिंह यादव यानि सांसद डिंपल यादव और तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव केकरीबी का टैग व पहचान सांसद प्रतिनिधि की। अब जब गाज गिरी तो सपा ने पल्ला झाड़ लिया और सपाइयों के मुंह सिल गए।
गौर करने वाली बात यह है कि 1997 में कन्नौज के जिला बनने और इसी दशक में एक सामान्य से महाविद्यालय पीएसएम के छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़कर बिरादरी की राजनीति शुरू करने वाले नबाब सिंह ने दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की की। सूत्र बताते हैं, महाविद्यालय में पढ़ाई करके ही कुछ ही वर्षों में पीएसएम के अध्यक्ष ने सपा से करीबी के बदौलन ब्लाक प्रमुख पद हासिल किया फिर इसी पीएसएम कालेज के समीप अपने स्वयं का चौधरी चंदन सिंह महाविद्यालय का स्थापना कर ली। चौधरी चंदन सिंह महाविद्यालय का उद्घाटन अखिलेश यादव ने कर दिया। लेकिन छात्र राजनीत और विधानसभा-लोकसभा के राजनीति जारी रही। वर्ष 2012 में डीएम अनुज झा और एडीएम रमेश यादव नबाब सिंह यादव के इशारे पर क्या काम नहीं हुए।
मकदूम जहानियां हो या फिर राज जयचंद्र का किला या फिर कोई अन्य पुरातत्व अवशेष हर जगह नबाब सिंह का जलवा दशकों तक कायम रहा। अब शिक्षा के मंदिर में नाबालिग से रेप जैसे जघन्य अपराध ने पूरी सामाजिक व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, एक ओर जहां पूरे मामले को लेकर राजनैतिक रोटियां सेकने की रस्साकस्सी है, वहीं कन्नौज के लोग दबाब-प्रभाव के कारण उलझन में हैं। नित्य नए खुलासे और चर्चाएं कन्नौज के वाशिंदों के लिए परेशानी और उलझन बनी हुई है।
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